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Definition of Pump Priming
jp Singh 2025-06-03 13:53:31
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पम्प प्राइमिंग की परिभाषा/Pump Priming

पम्प प्राइमिंग की परिभाषा/Pump Priming
परिभाषा: पम्प प्राइमिंग में सरकार अर्थव्यवस्था में पूँजी
उद्देश्य: माँग को प्रोत्साहित करना। रोजगार सृजन और बेरोजगारी में कमी। आर्थिक चक्र को पुनर्जनन करना।
उदाहरण: बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ (जैसे, सड़क, रेल, बंदरगाह)। सामाजिक कल्याण योजनाएँ (जैसे, मनरेगा, PM-KISAN)। कर छूट या सब्सिडी (जैसे, GST दरों में कमी)।
भारत में पम्प प्राइमिंग की स्थिति (2025 तक)
भारत ने मंदी या आर्थिक चुनौतियों (जैसे, कोविड-19) से निपटने के लिए पम्प प्राइमिंग का उपयोग किया है।
प्रमुख उदाहरण और प्रभाव
कोविड-19 प्रोत्साहन पैकेज (2020-21)
आत्मनिर्भर भारत पैकेज: ₹20 लाख करोड़ (GDP का 10%) का पैकेज, जिसमें MSME के लिए ऋण गारंटी, मनरेगा के लिए अतिरिक्त ₹40,000 करोड़, और PM-KISAN के तहत ₹2,000 की किसान सहायता शामिल थी।
प्रभाव: 2021 में GDP वृद्धि 8.7% तक उछली, जो पम्प प्राइमिंग का परिणाम था।
बुनियादी ढांचा निवेश
राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP): 2020-25 के लिए ₹111 लाख करोड़ की परियोजनाएँ, जैसे सड़क (Bharatmala), रेल (DFC), और स्मार्ट सिटी। प्रभाव: 2024 में बुनियादी ढांचा क्षेत्र ने 10 लाख से अधिक नौकरियाँ सृजित कीं (NITI Aayog)।
सामाजिक योजनाएँ
मनरेगा: 2024 में 12 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का रोजगार प्रदान किया। PM-KISAN: 11 करोड़ किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता, जिसने ग्रामीण माँग को बढ़ाया।
कर राहत
2020 में कॉरपोरेट कर 30% से घटाकर 22% किया गया, जिसने निवेश को प्रोत्साहित किया। GST दरों में छूट (जैसे, आवश्यक वस्तुओं पर 5% GST) ने उपभोक्ता खर्च को बढ़ाया।
आर्थिक प्रभाव
GDP वृद्धि: 2024 में भारत की GDP वृद्धि ~6.8% (RBI अनुमान)। रोजगार: बुनियादी ढांचा और सामाजिक योजनाओं से ग्रामीण और शहरी रोजगार में वृद्धि। मुद्रास्फीति: पम्प प्राइमिंग से माँग बढ़ने के कारण मुद्रास्फीति 2024 में ~5% रही, जिसे RBI ने रेपो दर (6.5%) से नियंत्रित किया।
भारत में पम्प प्राइमिंग की चुनौतियाँ
मुद्रास्फीति: उच्च सरकारी खर्च से 2024 में मुद्रास्फीति ~5% रही, जिसे RBI ने नियंत्रित किया। ऋण बोझ: भारत का राजकोषीय घाटा 2024 में GDP का 5% (वित्त मंत्रालय), जो दीर्घकालिक जोखिम पैदा करता है। लक्ष्यीकरण: लाभ गलत लोगों तक पहुँचने की समस्या (जैसे, सब्सिडी रिसाव)। क्षमता की कमी: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी और भ्रष्टाचार।
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