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Revolving Fund Scheme
jp Singh 2025-06-04 19:59:12
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Revolving Fund Scheme)

Revolving Fund Scheme)
ब्यावर्ती योजनाब्यावर्ती योजना (Revolving Fund Scheme)
ब्यावर्ती योजना, जिसे अक्सर रिवॉल्विंग फंड योजना के रूप में जाना जाता है, एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था है जिसमें एक निश्चित कोष (फंड) बनाया जाता है, जो बार-बार उपयोग और पुनर्भरण के लिए उपलब्ध होता है। यह योजना विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों (SHGs), सूक्ष्म वित्त, और सामुदायिक विकास कार्यक्रमों में उपयोग की जाती है, जैसे कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) या अन्य समान योजनाओं में। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना है।
ब्यावर्ती योजना की अवधारणा:
ब्यावर्ती कोष (Revolving Fund): यह एक ऐसा फंड है जो समूहों (विशेषकर SHGs) को प्रारंभिक पूंजी के रूप में प्रदान किया जाता है। इस कोष का उपयोग आय-उत्पादक गतिविधियों, छोटे व्यवसायों, या अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए किया जाता है।
पुनर्भरण: समूह द्वारा कोष का उपयोग करने और उससे आय अर्जित करने के बाद, मूल राशि (और कभी-कभी ब्याज) को वापस कोष में जमा किया जाता है, जिससे इसे दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
लचीलापन: यह कोष समूह के सदस्यों की तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए लचीला होता है और पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली की तुलना में कम औपचारिकताओं के साथ उपलब्ध होता है।
ब्यावर्ती योजना के प्रमुख पहलू:
उद्देश्य:
स्वयं सहायता समूहों को प्रारंभिक पूंजी प्रदान करना। समूह के सदस्यों को छोटे ऋणों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियां शुरू करने में सक्षम बनाना। वित्तीय अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना। दीर्घकालिक आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना।
प्रक्रिया:
कोष का आवंटन: सरकार, नाबार्ड, या अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा SHGs को ब्यावर्ती कोष प्रदान किया जाता है। उदाहरण के लिए, NRLM के तहत प्रति SHG को 10,000-15,000 रुपये का ब्यावर्ती कोष दिया जाता है।
उपयोग: समूह के सदस्य इस कोष से छोटे ऋण लेते हैं, जिसका उपयोग व्यवसाय, कृषि, या अन्य आय-उत्पादक गतिविधियों में किया जाता है।
वापसी: ऋण की राशि को निश्चित समय में (आमतौर पर कम ब्याज के साथ) वापस कोष में जमा किया जाता है, जिससे अन्य सदस्य इसका उपयोग कर सकें।
निगरानी: SHG के सदस्य सामूहिक रूप से कोष के प्रबंधन और वसूली की जिम्मेदारी लेते हैं।
लाभ:
वित्तीय समावेशन: ग्रामीण और गरीब महिलाओं को वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्रदान करता है।
आजीविका संवर्धन: छोटे व्यवसायों और उद्यमों को शुरू करने में मदद करता है।
सामुदायिक विकास: समूह के सदस्यों में सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोग की भावना को बढ़ाता है।
स्थिरता: कोष का बार-बार उपयोग होने से यह दीर्घकालिक वित्तीय संसाधन के रूप में कार्य करता है।
उदाहरण:
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM): इसके तहत SHGs को ब्यावर्ती कोष प्रदान किया जाता है, जो समूह की गतिविधियों को शुरू करने और बैंक लिंकेज स्थापित करने में मदद करता है।
नाबार्ड की SHG-बैंक लिंकेज योजना: ब्यावर्ती कोष के साथ-साथ बैंकों से ऋण प्राप्त करने की सुविधा प्रदान की जाती है।
राष्ट्रीय महिला कोष (RMK): हालांकि अब बंद हो चुका है, RMK ने भी ब्यावर्ती कोष के माध्यम से सूक्ष्म साख प्रदान की थी।
चुनौतियां:
प्रबंधन: कोष के दुरुपयोग या खराब प्रबंधन की संभावना।
वसूली: कुछ मामलों में ऋण की समय पर वसूली में कठिनाई।
जागरूकता: ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के लाभों और प्रक्रियाओं के बारे में कम जानकारी।
सीमित राशि: प्रारंभिक कोष की राशि कभी-कभी समूह की जरूरतों के लिए अपर्याप्त हो सकती है।
भारत में ब्यावर्ती योजना का महत्व:
भारत में ब्यावर्ती योजना ने ग्रामीण महिलाओं और निम्न-आय वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सूक्ष्म साख और आजीविका विकास के लिए प्रभावी रही है। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायक है।
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